02 January, 2022

यकीन मानिए भोजपुरी से आप हैं, भोजपुरी आपसे नहीं

 बदलते दौर के साथ भोजपुरी इंडस्ट्री में ना जाने कितने गायक, कलाकार, अभिनेता उभरे, चमके हैं। लेकिन पवन सिंह और खेसारीलाल यादव की ठसक कुछ अलग ही है। दोनों जने का सौतिनिया डाह तो जगजाहिर है। अक्सर विवादों में पड़कर चर्चा में बने रहते हैं। वैसे कहा जाता है कि किसी अयोग्य को कम समय में दौलत व शोहरत मिल जाए तो पचा नहीं पता। 

वहीं ज्योतिषशास्त्र की मानें तो कुंडली में शुक्र ग्रह के बलवती होने से आदमी को कला के क्षेत्र में भरपूर सफलता मिलती है। लेकिन यह ग्रह रसिया (चरित्रहीन) और नशेड़ी भी बनाता है। इन विवादों के पीछे की एक वजह ये भी है। जिससे इंकार नहीं किया जा सकता। भले ही पवन ने भक्ति गाने से पहचान बनाई थी और खेसारी ने 'देवरा चूसता...' गाकर। एक को हारमोनियम बजाने आता है, दूसरे को नहीं। 

लेकिन ये भी सच है कि लोक प्रचलित होने से दोनों ही कथित स्टार कहलाते हैं। जिम में अच्छी-खासी बॉडी बना लिए हैं। इनके फेसबुक व यूट्यूब पर लाखों की संख्या में व्यूअर, फैंस हैं। एक रात के स्टेज शो का लाखों रुपए लेते हैं। मुम्बई में फ्लैट, बीएमडब्ल्यू, मर्सडीज, फॉर्च्यूनर और जाने कितनी लग्जरी गाड़ियों के मालिक हैं। प्लेन से अक्सर विदेशों की यात्रा कर रहे हैं।

यहीं नहीं इन दोनों के अलावे अन्य कइयों ने भी भोजपुरी मनोरंजन के नाम पर पुरानी धुनों का रीमिक्स कॉकटेल परोसा है। लेकिन सवाल तो उठता है कि आपने सॉफ्ट पोर्न कंटेंट की आमदनी से जमाने भर का सुख हासिल तो कर लिया। बदले में आपने भोजपुरी को दिया क्या? यहीं न कि आज पढ़े-लिखे परिवारों में 'गंदी भाषा' के रूप में इसकी उपेक्षा की जाती है। देहातों तक में बच्चों को भोजपुरी में बतियाने से रोका और हिंदी के नाम पर 'अधबेसर जुबान' को बढ़ावा दिया जा रहा है। 

मिस्टर पवन, खेसारी, कल्लू, गोलू, रंगीला, रसिया आप जो भी हों, कान खोलकर सुन लीजिए। भले ही आप खुद को भोजपुरी का अलाना, फलाना स्टार मानते हैं। लेकिन सच्चाई यहीं है कि आर्केस्ट्रा में आपके फुहर पॉप पर कमर मटकाने वाला भोजपुरिया समाज घर में भोजपुरी गाना आते ही चैनल बदल देता है। मोबाइल की आवाज को कम या म्यूट कर देता है। आप जैसे कलाकारों की बदौलत ही यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक पेज व रील पर 90 प्रतिशत अश्लील भोजपुरी कंटेंट भरे पड़े हैं। जहां आपकी हैसियत एक नचनिया और लवंडा से ज्यादा की नहीं है।

यकीन रखिए, बाजार में भंजाने के लिए तैयार किए गए आपके द्विअर्थी कंटेंट समय के साथ भुला दिए जाएंगे। आपकी तमाम उपलब्धियां का, जिसमें मौलिकता है ही नहीं, किसी दिन कचरे की ढेर में जाना तय है। 

हम 20 करोड़ भोजपुरी भाषियों के पास आज भी गिनाने के लिए महेंद्र मिश्र, भिखारी ठाकुर, लक्ष्मण शाहाबादी, चित्रगुप्त, मोती बीए, शैलेन्द्र, नजीर हुसैन, मो. खलील, शारदा सिन्हा, चंदन तिवारी, भरत व्यास, गायत्री ठाकुर, विष्णु ओझा, मदन राय, गोपाल राय, शैलेन्द्र मिश्रा, अमित उपाध्याय, राहुल सांकृत्यायन जैसे दर्जनों थाती हैं। वर्षों से घर-आंगन में नानी, दादी, मां फुआ, बहनों द्वारा सामुहिक रूप में गाए जा रहे कजरी, पूर्वी, निर्गुण, सोहर, वैवाहिक नेग के गाने हैं। 

इन पर आने वाली पीढ़ी युगों-युगों तक रस्क महसूस करेगी। हमें गर्व होना चाहिए, भारत समेत दुनिया के तमाम शहरों में रोजगार के लिए प्रवास कर रहे उन हजारों कलाकारों, लेखकों, कवियों, निर्देशकों, बुद्धिजीवियों, विचारकों पर। जो अलग-अलग माध्यम से भोजपुरी की गरिमा बढ़ाने के लिए निस्वार्थ लगे हैं। मातृभाषा के विकास के लिए इनकी मुहिम एक दिन निश्चित रंग लाएगी।

©️®️श्रीकांत सौरभ



3 comments:

  1. बिल्कुल सही कहा आपने। भोजपुरी के अश्लील और रीमिक्स गानों की वजह से ही शहरों में रहने वाले लोग भोजपुरी में बात नहीं करते। इन्होंने अपने टारगेट ऑडियंस का चुनाव कर लिया है और नॉट छाप रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

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  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (4-1-22) को "शिक्षा का सही अर्थ तो समझना होगा हमें"(चर्चा अंक 4299)पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

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  3. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति

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